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मंगलवार, 24 फ़रवरी 2015

JARA HANS LO YAAR

-एक लड़का गली में भागता हुआ आया और इधर उधर पुलिस को ढूंढने लगा!

उसे एक पुलिस वाला नजर आया उसने कहा सर प्लीज जल्दी मेरे साथ बार में चलिए वहां मेरे पापा का झगड़ा हो रहा है!

ठीक है! वे जल्दी से बार में पहुँच गए और वहां देखा तो तीन आदमी बुरी तरह से आपस में लड़ रहे थे!

कुछ देर बाद पुलिस वाला उस बच्चे की तरफ मुड़ा और पूछा की इनमें तुम्हारे पापा कौन से है!

बच्चे ने पुलिस वाले की तरफ देखा और कहा मैं नहीं जानता सर, इसी बात को लेकर तो इनमें झगड़ा हो रहा है!

JARA HANS LO YAAR

एक तरैया देखी जब
पांच ब्राहान न्योते तब
अरसराम, परसराम
तुलसी, गंगा, सालगराम!
अरसराम खाएँ अरसे तक
परसराम खाएँ परसे तक
तुलसी, तुलसीदल पर रहे
गंगा, गंगाजल पर रहे!
मगर अनूठे सालगराम
रहें ताकते सबके काम
इसका खाना उसका पीना
यही बन गया उसका जीना

पांच पांच भी सस्ते पड़े
पुन्न सहज मिल गए बड़े|
-भवानीप्रसाद मिश्र

JARA HANS LO YAAR

रात को या दिन को
अकेले में या मेले में
हम सब गुनगुनाते रहें
क्योंकि गुनगुनाते रहे हैं भौंरे
गुनगुना रही हैं मधुमक्खियाँ
नीम के फूलों को
चूसने की धुन में
और नीम के फूल भी महक रहे हैं
छोटे बड़े सारे पंछी चहक रहे हैं|

क्या हम कम हैं इनसे
अपने मन की धुन में
या रूप में या गुन में
सन गाएँ सब गुनगुनाएँ
झूमे नाचे आसमान सिर पर उठाएँ!
-भवानीप्रसाद मिश्र

अमीरों को ढेर सारे दोस्त मिल जाते हैं-रहीम दर्शन पर आधारित चिंत्तन लेख


     

      एक तरफ कुछ लोगों के पास एकदम सहजता से धन आ रहा है तो दूसरी तरफ अधिकतर लोग भारी परिश्रम के बाद भी वैसी सफलता हासिल नहीं कर पा रहे जिसकी वह अपेक्षा करते हैं। विश्व में राज्य से मुक्त अर्थव्यवस्था ने समाज में अनेक प्रकार के विरोधाभास पैदा किये हैं। कृषि, लघु उद्योग तथा व्यापार में लगे लोगों की संख्या कम होती जा रही है। अधिकतर लोग नौकरियों के लिये कंपनियों की तरफ दौड़े जा रहे हैं। एक तरह से मध्यम वर्ग का दायरा सिमट रहा है। समाज में अधिक अमीरों की संख्या नगण्य मात्रा  जबकि गरीबों की संख्या गुणात्मक रूप से बढ़ रही है।  इन दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाला मध्यम वर्ग जहां संख्यात्मक दृष्टि से सिमटा है वहीं उसका आत्मविश्वास भी कम हुआ है।  वह गरीब कहलाना नहीं चाहता और अमीर बन नहीं पाता।  इतना ही नहीं अपने अस्तित्व के लिय संघर्ष कर रहे लोगों से यह अपेक्षा भी नहीं की जा सकती कि वह समाज में सामंजस्य का वातावरण बनाये।

      भौतिकवाद के चक्कर मे फंसा समाज हार्दिक प्रेम, निष्प्रयोजन मित्रता तथा आदर्श व्यवहार के भाव से परे होता जा रहा है।  देखा जाये तो हमारे देश में जिस तरह धनिकों का भंडार बढ़ने के साथ ही  ही समाज में व्यसन, अपराध तथा शोषण की प्रवृत्ति भी तेजी बढ़ती  जा रही है।  कथित आर्थिक विकास ने नैतिकता का जहां विध्वंस करने के साथ ही अध्यात्मिक ज्ञान की धारा को अवरुद्ध कर दिया है। सबसे बड़ी बात तो यह कि विभिन्न समाजों के बीच ही नहीं बल्कि उनक अंदर ही सद्भाव काम कर दिया है। लोग औपचारिक रूप से आपसी संपर्क तो रखते हैं पर हार्दिक प्रेम का नितांत अभाव है।

कविवर रहीम कहते हैं कि

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रहिमन कीन्ही प्रीति, साहब को भावै नहीं,

जिनके अनगिनत भीत, हमैं, गरीबन को गनै।

     सामान्य हिन्दी में भावार्थ-धनियों के अनेक मित्र बन जाते हैं। उनको गरीब लोगों से मित्रता करना अच्छा नहीं लगता। बड़े लोगों को छोटे लोगों की प्रीति अच्छी नहीं लगती।

कंपनी नाम की व्यवस्था ने साहब, सचिव और सहायक का अंतर इस तरह स्थापित किया है कि लगता है कि यह कोई आधुनिक विभाजन है। विभिन्न पदों के लिये होने वाले प्रशिक्षण में यह बता दिया जाता है कि अपने से निचले स्तर के व्यक्ति के साथ समान सबंध स्थापित न करें वरना आपको अपने काम में ही परेशानी उठानी पड़ेगी।  धनिका परिवारों में भी निम्न वर्ग के लोगों को अपना अनुचर मानकर व्यवहार करने के संस्कार स्वाभाविक रूप से ही मिलते हैं।  अमीरों के अनुचर बनने वाले मध्यम और निम्न वर्ग के युवक युवतियों को यह आभास नहीं होता कि उन्हें उच्च वर्ग से हार्दिक प्रेम की आशा नहीं  करनी चाहिये।  जीवन का यथार्थ यही है कि हर बड़ी मछली छोटी को ही खा जाती है।

कहत कबीर फकीर पुकारी, जग उल्टा व्यवहार ।। निरंजन धन तुम्हरो दरबार ।

निरंजन धन तुम्हरो दरबार ।
जहाँ न तनिक न्याय विचार ।।

रंगमहल में बसें मसखरे, पास तेरे सरदार ।
धूर-धूप में साधो विराजें, होये भवनिधि पार ।।
वेश्या ओढे़ खासा मखमल, गल मोतिन का हार ।
पतिव्रता को मिले न खादी सूखा ग्रास अहार ।।
पाखंडी को जग में आदर, सन्त को कहें लबार ।
अज्ञानी को परम‌ ब्रहम ज्ञानी को मूढ़ गंवार ।।
साँच कहे जग मारन धावे, झूठन को इतबार ।
कहत कबीर फकीर पुकारी, जग उल्टा व्यवहार ।।
निरंजन धन तुम्हरो दरबार ।
-कबीर

-पत्नी (पति से)- देखो जी

-पत्नी (पति से)- देखो जी, हमारी शांताबाई का पति, उसको खुश रखने के लिए, हर हफ्ते फिल्म दिखाने ले जाता है, आप क्यों नही ले जाते?

पति (पत्नी से)- अरे, मैंने भी शांताबाई को फिल्म के लिए बुलाया, लेकिन उसने मना कर दिया, इसमें मेरी क्या गलती है?
-पति पत्नी और वो

-पत्नी (पति से)- मुझे 50 रुपये की जरूरत है!

पति (गुस्से से)- तुम्हें रुपये से ज्यादा अक्ल की जरूरत है!

पत्नी- आपसे वही चीज मांगी है, जो आपके पास है!
-पति पत्नी और वो
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-पत्नी (पति से)- तुम्हें नही लगता की जरा सी समझदाराी से लाखों तलाक के मामले रोके जा सकते हैं।

पति (पत्नी से)- जरा सी समझदारी से शादियां भी तो रोकी जा सकती है।
-पति पत्नी और वो

-मरते समय पति ने अपनी पत्नी को सब कुछ सच बताना चाहा। उसने कहा- मैं तुम्हें जीवन भर धोखा देता रहा।
सच तो यह है कि दर्जनों औरतों से मेरे संबंध रहे हैं।
पत्नी (पति से)- मैं भी सच बताना चाहूंगी। तुम बीमारी से नही मर रहे मैंने तुम्हें धीरे-धीरे असर करने वाला जहर दिया है।
-पति पत्नी और वो

-एक घर में चोर घुस गया, पति-पत्नी ने मिलकर चोर को पकड़ लिया।
पत्नी जो बहुत ही मोटी थी, चोर के कंधो पर बैठ गई और बोली- सुनोजी आप जल्दी से पुलिस को बुला लाओ, तब तक मैं इसे पकड़ कर रखती
हूं पति इधर-उधर देखने लगा।
बीवी- अरे क्या देख रहे हो?
पति- मेरी चप्पल नहीं मिल रही...
चोर (कराहते हुए) - जल्दी कर भाई, मेरी ही पहन जा!
-पति पत्नी और वो
-

-पति और पत्नी मंदिर में गये।
पति ने पूछा- तुमने क्या मांगा?
पत्नी ने कहा- आप और मैं सात जनम तक साथ रहें।
पत्नी- और आपने क्या मांगा?
पति- ये हमारा सातवां जनम हो।
-पति पत्नी और वो

-वृद्ध पति-पत्‍‌नी अपनी शादी की पचासवीं वर्षगांठ मना रहे थे।
एक समाचार पत्रकार का रिपोर्टर उनसे इंटरव्यू लेने आया। मैंने सुना है भटनागर जी, कि केवल 1500 रुपये के मासिक वेतन पर आपने सात
बेटों तथा चार बेटियों का पालन किया है।
श..श..श.. इतनी जोर से न बोलो। क्या तुम मेरी इस अवस्था में फजीहत कराना चाहते हो? मेरी पत्‍‌नी का तो सदा यह विचार रहा है कि मुझे
केवल 1200 रुपये मासिक मिलता है।
-पति पत्नी और वो

-एक डॉक्टर के क्लिनिक के बाहर मरीजों की भीड लगी थी!

जब कोई आदमी आगे जाता, उसे लोग पकड के पीछे खींच लेते, एक आदमी कई बार आगे जाने की कोशिश किया पर उसे भी लोगों ने पीछे खींच लिया!

5-6 बार पीछे खींचे जाने के बाद वो आदमी चिल्लाया...

सालों...लगे रहो लाईन में.....मै भी आज क्लिनिक नहीं खोलूँगा!
-डॉक्टर

-डॉक्टर(पागल से): तुम पागल कैसे हुए?

पागल: मैंने एक विधवा से शादी की, उसकी जवान बेटी से मेरे बाप ने शादी की तो मेरी वो बेटी मेरी मां बन गई उनके घर बेटी हुई तो वह मेरी बहन हुई, मगर मैं उसकी नानी का शौहर था, इसलिए वह मेरी नवासी भी हुई इसी तरह मेरा बेटा अपनी दादी का भाई बन गया, और मैं अपने बेटे का भांजा और मेरा बाप मेरा दामाद बन गया, और मेरा बेटा अपने दादा का साला बन गया और...

डॉक्टर: अबे चुपकर मुझे भी पागल करेगा क्या?
-डॉक्टर

-एक आदमी डॉक्टर के पास गया,और डॉक्टर से कहा: डॉक्टर साहब मुझे लगता है कि मेरी बीवी को सुनने में कुछ समस्या है, जितना सुनाई दिया जाना चाहिए उतना भी उसे मुश्किल से सुनाई देता है, आप ही बताएं कि मैं क्या करूँ?

डॉक्टर ने कहा पहले तो आप वो कीजिये जो मैं कहता हूँ जब आपकी बीवी रसोई में खाना बना रही हो तो आप 15 कदम दूर से उनसे कुछ पूछना,अगर वो जवाब न दे तो थोड़ा पास जाकर फिर वही बात पूछना जब तक वो जवाब न दें!

वह अपने घर गया उसने देखा कि उसकी बीवी रसोई में खाना पका रही है, वह कोई 15 कदम दूर खड़ा हो गया उसने आवाज लगाईं, अरे भई खाने में क्या बन रहा है?

उसे कोई जवाब सुनाई नहीं दिया वह थोड़ा सा आगे गया!

लगभग 10 कदम से आवाज लगाईं, उसने फिर से वही पूछा, फिर भी उसे कोई जवाब सुनाई नहीं दिया!

आखिर में वो अपनी पत्नी के बिलकुल पीछे खड़ा हुआ और उसने फिर वही प्रश्न पूछा,अरे! आज खाने में क्या बन रहा है?

चौथी बार कह रही हूँ चिकन! अच्छा है कि तुम अपने कान डॉक्टर को दिखा आओ!
-डॉक्टर
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-एक कस्बे में एक नया डॉक्टर आया जो कुछ ही दिनों में काफी चर्चित हो गया, सब कहने लगे कि वो चमत्कारी है, वह किसी की किसी भी बीमारी का इलाज कर देता था, सभी लोग उससे चकित थे कि वो ये सब कैसे कर लेता है, सिवाय बंता के?

तो एक दिन बंता उस डॉक्टर के पास ये साबित करने गया कि वो कोई चमत्कारी नहीं है!

वह अंदर गया और डॉक्टर से कहा कि मैं अपनी स्वाद लेने वाली इन्द्री खो चुका हूँ मैं कुछ भी चखता हूँ, मुझे उसका स्वाद नहीं आता?

डॉक्टर अपने सिर को खुजलाने लगा, और अपने मुहं के अंदर बड़बड़ाने लगा इसे क्या दूँ? इसे क्या दूँ?

और एक दम से कहा ज़ार नम्बर 43 डॉक्टर ने कहा तुम्हें 43 नम्बर का ज़ार कि जरुरत है, बंता हैरान होकर कहने लगा कि 43 नम्बर का ज़ार?

तभी डॉक्टर कहीं बाहर गया और 5 मिनट बाद हाथ में एक डब्बा लाया और बंता को उसमें से कुछ निकाल के दिया बंता ने जैसे ही चखा वैसे ही थूक दिया!

छि: छि: ये तो टट्टी है! वो जोर से चिल्लाया...

डॉक्टर ने कहा मैंने तुम्हारी जीभ का स्वाद ठीक कर लिया है, तब बंता बहुत दुखी होकर अपने घर वापिस गया!

एक महीने बाद फिर से बंता एक नयी समस्या लेकर उसी डॉक्टर के पास आया और कहने लगा डॉक्टर साहब अब मुझे कुछ भी याद नहीं रहता है, मेरी स्मरण शक्ति कमजोर हो गयी है!

उसने फिर डॉक्टर को परेशानी में डाल दिया, डॉक्टर फिर सिर खुजलाने लगा और मुहं में बड़बड़ाने लगा! क्या करूँ? क्या करूँ? तब बंता से कहा, क्या तुम्हें ज़ार नम्बर 43 याद है!

जैसे ही डॉक्टर के मुहं से बंता ने ज़ार नंबर 43 सुना उसने आगे कुछ भी नहीं सुना और वहां से तुरंत भाग गया!
-डॉक्टर
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-डॉक्टर: मुझे लगता है तुम पूरा एक महीने बाद यहाँ आये हो तुमने मेरी बात नहीं मानी, जबकि मैंने तुम्हें कहा था की जो तुम्हारी बीमारी है, उसमें तुम्हें लगातार अपनी जाँच करवानी पड़ेगी?

क्या तुम्हारे पास कोई बहाना है?

रोगी: मैंने तो बस आपकी ही बात मानी है साहब!

डॉक्टर: मेरी कौन सी बात मानी है? तुम क्या कह रहे हो? मैंने तो तुम्हें कोई बात नहीं कही थी!

रोगी: आपने ही तो कहा था कि जिन लोगों को देख कर चिढ़ हो उनसे दूर ही रहना!
-डॉक्टर

-एक बार एक स्वास्थ्य मंत्री एक मनोरोगियों के अस्पताल में गया, वह सबसे पहले मुख्य मनोचिकित्सक से मिला फिर उससे पूछने लगा आप कैसे पता लगाते हैं कि एक रोगी बिल्कुल ठीक हो गया है!

मनोचिकित्सक उसे एक कमरे में ले गया जहाँ कुछ रोगी खड़े थे और पास में एक बाथटब पानी से भरा हुआ था मनोचिकित्सक ने कहा, सर हम उन्हें उस बाथटब के पास ले जाते हैं!

और उन्हें एक चम्मच और एक कप देते हैं, और उन्हें बाथटब खाली करने को कहते हैं हाँ मैं देख रहा हूँ!

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा! जो बिलकुल ठीक हो जाता है वो तो कप का इस्तेमाल करता होगा ताकि टब जल्दी खाली हो जाए!

मनोचिकित्सक ने कहा, जी नहीं सर!

जो बिलकुल ठीक हो जाता है वो सीधे जाकर इलैक्ट्रिक प्लग दबाता है, जिससे पानी खुद-ब-खुद बाहर चला जाता है!
-डॉक्टर

पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों को


पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों को अधूरी जानकारी होती है और ज्यादातर वे निवेश की परिस्थितियों में आने वाली अनिश्चितताओं से प्रभावित हो जाते हैं। लेकिन म्यूचुअल फंड निवेश में बाजार के समय से भी अधिक महत्वपूर्ण बातें हैं जो ध्यान रखनी चाहिये।

सबसे पहले ध्यान रखे

एक महत्वाकांक्षी यूनिट धारक को सबसे पहले ये तय करना चाहिये कि वो किस तरह के पोर्टफोलियो (निवेश सूची) का निर्माण करना चाहता है। दूसरे शब्दों में उसे अपनी सम्पत्ति के सही विनियोजन का फैसला करना चाहिये।ये ऐसेट एलोकेशन (asset allocation) कहलाता है। ऐसेट एलोकेशन वो तरीका है जो ये निर्धारित करता है कि आप अपने पैसे को विभिन्न निवेशों में कैसे लगायें जिसमें सम्पत्ति के सभी वर्गों का उचित मिश्रण हो।

ऐसेट एलोकेशन के लोकप्रिय नियम कहते हैं कि निवेशक की जो भी उम्र हो,उसे अपने पोर्टफोलियो में अपनी उम्र जितना धन प्रतिशत रखना चाहिये। उदाहरण के लिये- यदि निवेशक की उम्र 25 साल है तो उसे अपने निवेश का 25% ऋण (debt instrument) में और शेष इक्विटी में लगाना चाहिये।

हालांकि वास्तविकता में, प्रत्येक व्यक्ति की विभिन्न परिस्थितियों और वित्तीय हालत के अनुसार अलग अलग निवेश आवंटन की जरूरत हो सकती है। ऐसेट एलोकेशन को समझने के लिये आपको विभिन्न कारको की भी जानकारी होनी चाहिये जैसे-आयु, व्यवसाय, आप पर निर्भर परिवार के सदस्यों की संख्या आदि। सामान्यतः जितने अधिक आप युवा हैं उतने ही जोखिम भरे निवेश आप रख सकते हैं जिनसे आपको बेहतर रिटर्न मिले।

सही फंड कैसे चुनें

सही फंड चुनने के लिये ध्यान रखें— कि सही फंड चुनने की कुंजी उनके निवेश सिद्धांत और रिटर्न देने की स्थिरता पर निर्भर करती है। आप सही फंड चुनें जो आपकी जरुरतों के लिये उपयुक्त हो, ये सुनिश्चित करने के लिये निम्न बातों पर विचार करें:

•    अपने आर्थिक लक्ष्यों को निर्धारित करें।

•    क्या आप अपनी सेवानिवृत्ति के लिये निवेश कर रहे हैं ?य़ा अपने बच्चे की शिक्षा के लिय ?, या फिर वर्तमान आमदनी के लिये ?

•    अपनी समय सीमा पर विचार करें। क्या आपको तीन महिने के समय में पैसा चाहिये या फिर तीन साल में  ? , जितना विस्तृत आपका समय होगा उतना ज्यादा जोखिम आप निवेश में उठाने के काबिल होंगे।

•    आप जोखिम उठाने के बारे में क्या सोचते हैं  ? क्या आप उच्च रिटर्न की संभावना के लिये शेयर बाजार के उतार चढाव को बर्दाश्त करने की स्थिति में हैं? आपको अपने स्वंय की जोखिम उठाने की क्षमता के बारे में अवश्य पता होना चाहिये,यह सही निवेश योजना को चुनने के लिये एक गाइड हो सकता है। याद रखें,संभावित रिटर्न की चिन्ता किये बिना यदि आप किसी विशेष परिसंपत्ति वर्ग के साथ सहज नही हैं तो आपको अन्य निवेश विकल्पों पर विचार करना चाहिये।

•    ध्यान रखें-इन सभी कारकों का सीधा प्रभाव उन फंड पर पङता है जिन्हें आप चुनते हैं और जो रिटर्न आप प्राप्त करने की उम्मीद रखते हैं

इस 2015 बजट में आम लोगों को

इस बजट में आम लोगों को 80(सी) के अलावा टैक्स बचाने के दूसरे ऑप्शन भी मिल सकते हैं। साथ ही 25,000-50,000 तक के निवेश के नए विकल्प आ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक बजट में टैक्स स्लैब की समीक्षा संभव है और टैक्स बेस बढ़ाने के लिए 3 के बदले 4 टैक्स स्लैब बनाए जा सकते हैं।

इस बजट से आंत्रप्रेन्योर की मांग है कि बिजनेस से जुड़े कागजी काम कम किए जाएं। अलग-अलग टैक्स के बदले सिंगल टैक्स सिस्टम हो। बिजनेस बढ़ाने के लिए सस्ता कर्ज मिले। आंत्रप्रेन्योर्स के लिए अगल से फंड बनाया जाए।

गृहिणियां चाहती हैं शॉर्ट टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी का रिटर्न टैक्स फ्री हो। इंश्योरेंस के कुछ प्रोडक्ट को भी निवेश का अहम जरिया माना जाए।

छोटे निवेशकों की मांग है कि प्रॉपर्टी में निवेश को बढ़ावा दिया जाए। छोटे निवेशकों को बढ़ावा देने के लिए आरईआईटीएस को लागू किया जाए। फिलहाल आरईआईटीएस के तहत 2 लाख रुपये का निवेश किया जा सकता है।

बुजुर्गों की मांग है कि पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम और एफडी के अलावा भी निवेश के ऑप्शन हों। और 10 साल के टैक्स फ्री सीनियर सिटीजन बॉन्ड लॉन्च किए जाएं। बॉन्ड पर 12 फीसदी का ब्याज हो और एक साल के बाद रकम निकालने की छूट हो। बुजुर्गों कहा कि 80(सी) के अलावा पेंशन के लिए अलग सेक्शन बनाया जाना चाहिए और पेंशन के रिटर्न पर टैक्स छूट मिलनी चाहिए।

सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

THOUGHTS OF THE DAY

जो लोग हमेशा दूसरों की बुराई करके खुश होते हो। ऐसे लोगों से दूर ही रहें। क्योंकि वे कभी भी आपके साथ धोखा कर सकते है। जो किसी और का ना हुआ वो भला आपका क्या होगा।.~ चाणक्य

THOUGHT OF THE DAY

शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है. शिक्षित व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है. शिक्षा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और सौंदर्य दोनों ही कमजोर हैं !.~ चाणक्य