शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है. शिक्षित व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है. शिक्षा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और सौंदर्य दोनों ही कमजोर हैं !.~ चाणक्य
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सोमवार, 23 फ़रवरी 2015
JARA HANS LO YAAR
-तीन मरे हुए राजनीतिज्ञों के शव शमशान में उठ खड़े हुए सभी के मुहं में बड़ी मुस्कान थी, पुलिस ने डाक्टर को बुलाया ये देखने के लिए की क्या हो गया है, एक जासूस पुलिस वाले को भी बुलाया गया की देखें क्या हुआ है!
पहले शव को देखकर डाक्टर ने कहा, ये बी.जे.पी का नेता है जो हर्ट अटैक से मरा जब ये अपनी नौकरानी के साथ प्यार कर रहा था इसीलिए बड़ी हंसी हंस रहा है डाक्टर ने कहा!
पुलिस ने दूसरा शव बाहर निकाला तो डाक्टर ने कहा ये सतासीन पार्टी का नेता है, इसकी उम्र 70 साल है सरकारी कोष में घोटाले करके सारा पैसा शराब में उड़ाया लीवर ख़राब होने से मरा फिर भी मुस्करा रहा है ये कुछ खास नहीं है!
पुलिस ने सोचा और तीसरे शव को देखा, डाक्टर ने कहा ये सबसे अनोखा है, बिहार का सांसद, उम्र 60 साल ये आसमानी बिजली के गिरने से मर गया!
पुलिस वाले ने पूछा पर ये हंस क्यों रहा है?
तो डाक्टर ने कहा, ये अभी भी यही सोच रहा है की इसकी फोटो खिंची जा रही है!
-राजनीति
JARA HANS LO YAAR
-एक टीचर अपनी क्लास के बच्चों को कहती है की वो अमेरिकन है, वो अपनी क्लास के बच्चों से कहती है की यदि वो भी अमेरिकन है तो हाथ उठायें, वो नहीं जानते थे की ऐसा क्यों कह रही है पर अपनी टीचर की तरह लगने के लिए, उन्होंने अपने हाथ आग की लपटों की तरह हवा में उठा दिए!
पर वहां एक लड़की अपवाद की तरह बैठी थी!
उसका नाम गीता था और वो भीड़ के साथ नहीं भागी!
टीचर ने उसको पूछा, वो सबसे अलग क्यों रहना चाहती है गीता ने कहा, क्योंकि वो अमेरिकन नहीं है!
तब टीचर ने पूछा तो तुम क्या हो?
उसने गर्व से कहा, मैं भारतीय हूँ, और इस पर मुझे गर्व है!
टीचर को अब गुस्सा आ गया उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया उसने पूछा, तुम भारतीय क्यों हो?
गीता ने कहा क्योंकि मेरे मम्मी पापा भारतीय हैं, इसलिए मैं भी भारतीय हूँ!
अब टीचर का गुस्सा और बढ़ गया!
ये कोई कारण नहीं है उसने चिल्लाते हुए कहा, अगर तुम्हारी मम्मी और पापा "ईडीयट" है तो तुम क्या हो?
थोड़ी देर रुकने के बाद हल्की सी मुस्कान के साथ!
गीता ने कहा फिर मैं अमेरिकन हूँ!
-बच्चे
JARA HANS LO YAAR
-कवि अपनी बीवी को कविताएं सुनाने लगा तो वह बोली- तुम मुझे कविताएं सुनने के लिए मजबूर नहीं कर सकते..
क्यों, आखिर तुम मेरी पत्नी हो, तुम ही नही सुनोगी, तो फिर कौन सुनेगा? कवि बोला।
मैं स्त्री एवं पुरुषों के समान अधिकारों को पसंद करती हूं। इसलिए मैंने भी आज से कविता लिखना प्रारंभ कर दिया है। लीजिए, मेरी कविता
सुनिए, कवि की बीवी कंधे उचकाती हुई बोली।
अरे छोड़ो, मैं तो ऐसे ही मजाक कर रहा था। चलो, कोई दूसरी बात करते हैं, कवि महोदय ने घबराते हुए कहा।
-पति पत्नी और वो
JARA HANS LO YAAR
-एक बार पठान अपनी बेगम के साथ मेला देखने गया। मेले में हवाई जहाज की सैर भी करवाते थे।
पठान ने सोचा कि चलो हम भी हवाई जहाज की सैर कर लेते हैं लेकिन 200 रुपये की टिकट सुनकर पठान का मुंह लटक गया।
यह देखकर चालक बोला, "आप हवाई जहाज में आधा घंटा सैर कर सकते हैं। इस दौरान अगर आप के मुंह से आवाज़ निकली तो मैं आप से टिकट के पैसे लूंगा, नहीं तो यह सैर आप के लिए मुफ्त।"
पठान सुन कर खुश हो गया और मान गया।
दोनों जहाज में बैठ गए और चालक ने अपने करतब दिखाने शुरू कर दिए।
चक्कर बनाया, उल्टा घुमाया और कभी डाइव लगायी।
आखिर में उसने जहाज नीचे उतारा।
नीचे उतरने के बाद चालक बोला, "मान गए पठान साहब आपको, इस तरह के करतबों के साथ तो किसी की भी चीखें निकल जाती लेकिन आपने तो एक आवाज़ नहीं निकाली।"
पठान ने अपने माथे से पसीना पोंछा और बोला, "अब आपको कैसे बताऊँ कि किस तरह मैंने अपने आप को रोका यहाँ तक कि बेगम के बाहर गिरने पर भी मैं नहीं बोला क्योंकि 200 रुपये का सवाल था।"
-पठान
JARA HANS LO YAAR
-एक पागलों के अस्पताल में बहुत भीड़ हो चुकी थी, डाक्टर ने फैसला किया की जो मरीज कुछ ठीक हैं उन्हें यहाँ से भेज दिया जायेगा, इसलिए उन्होंने सभी मरीजों को एक बड़े हॉल में इक्कट्ठा किया!
वहां पहले से ही पूरी दिवार पर ब्लैकबोर्ड के आकर का दरवाजा बनाया था डाक्टर ने कहा जो भी मरीज इस दरवाजे को खोलेगा उसे एक आईसक्रीम दी जाएगी!
ऐसा सुनते ही सारे मरीज उस दिवार पर टूट पड़े, मरीजों ने दिवार को खरोंच दिया, और दरवाजे पर जो हैंडल लगाया था उसे भी तोड़ दिया!
डाक्टर को बहुत दुःख हुआ, तभी उसने देखा की एक मरीज कुर्सी पर बैठा दबी हंसी हंस रहा था, और अपने साथियों को देख रहा था!
डाक्टर को थोड़ा हौंसला आया की चलो आज एक मरीज तो है जिसे भेजा जाये, डाक्टर ने उससे पूछा, तुम दरवाजा खोलने की कोशिश क्यों नहीं कर रहे हो?
मरीज जो अपनी हंसी को ज्यादा देर तक नहीं रोक पाया, जोर से चिल्लाया, दरवाजा कैसे खुलेगा 'चाबी तो मेरे पास है'
-डॉक्टर
JARA HANS LO YAAR
-एक ताऊ हस्पताल में आखिरी साँसे गिन रहा था उसका परिवार व एक नर्स उसके बिस्तर के पास खड़े थे।
ताऊ अपने बड़े बेटे से बोला,"बेटा, तुम मेरे TDI City वाले 15 बंगले ले लो।
बेटी से कहा,"तू सोनीपत सेक्टर 14 के बंगले ले ले।
छोटे बेटे से कहा,"तू सबसे छोटा है और मुझे सबसे ज्यादा प्यारा भी तुझे मैं रोहिणी सेक्टर 24 पॉकेट 13 की 20 दुकाने देता हूँ"।
आखिर में ताऊ पत्नी से बोला,"मेरेबाद तुम्हें पैसों के लिए किसी का मुँह न ताकना पड़े इसलिए मेरे यूनिटी वाले 12 फ़्लैट तुम अपने पास रख लो।"
पास में खड़ी नर्स, जो यह सब सुन रही थी, बहुत प्रभावित हुई उसने ताऊ की पत्नी से कहा, "आप बहुत भाग्यशाली हैं कि आपको इतने अमीर पति मिले जो इतनी सारी जायदाद देकर जा रहे हैं।"
पत्नी: "कौन अमीर ? कैसी जायदाद ? अरे ये दुधिया है हम सबको जिम्मेदारियां बाँट रहे हैं सुबह-सुबह दूध पहुंचाने की।
मरने के बाद भी उसे सुकून नहीं
मरने के बाद भी उसे सुकून नहीं मि
आपने किस्से-कहानियों में तो कई बार देखा और सुना होगा कि जब भी किसी ने मरने के बाद इंसानों की दुनिया से मोह रखा है उसके इस मोह और लगाव का खामियाजा उसे नहीं बल्कि उन लोगों को भुगतना पड़ा है जिनके साथ उस व्यक्ति का संबंध था. यह कहानी भी ऐसे ही एक बच्चे की है जो अपनी मां से बहुत प्यार करता था इतना कि उनके बिना एक दिन भी नहीं रह पाता था. दस वर्ष की उम्र में सौरव को उसके पिता जी ने हॉस्टल भेज दिया लेकिन वह अपनी मां से दूर नहीं जाना चाहता था.
सौरव को हॉस्टल भेजने का एक कारण उसका हर समय डरना और आत्मनिर्भर ना बन पाना था. सौरव अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था इसीलिए उसके अभिभावक उसे सारी खुशियां देना चाहते थे लेकिन सौरव का व्यवहार उन्हें बहुत परेशान करता था. वह किसी से बात नहीं करता था और अकेला ही रहता था. इसीलिए उसे हॉस्टल भेज दिया गया.
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सौरव अनमने ढंग से हॉस्टल जाने के लिए तैयार हो गया. माता-पिता की जबरदस्ती उसे बिल्कुल पसंद नहीं आ रही थी लेकिन फिर भी हॉस्टल जाना उसकी मजबूरी बन गया. उसके माता-पिता उसे छोड़ने हॉस्टल तक भी आए लेकिन उन्हें बाय कहते समय भी सौरव का चेहरा उदास था. सौरव की मां ने तो अपने दिल पर पत्थर रखकर बेटे को अलविदा कहा
खैर दिन बीतने लगे लेकिन दिन बीतने के साथ-साथ सौरव का अपनी मां से अलगाव और दुखदायी होने लगा. वह अपनी क्लास के बच्चों से घुलमिल नहीं पा रहा था और शिक्षकों का सख्त व्यवहार उसे बहुत परेशान किए हुए था. वह दिन-रात रोता रहता और अपनी मां को फोन पर सब बताता.
सौरव की मां अपने इकलौते बच्चे को बहुत मिस करती थी वहीं सौरव भी अपने घर को बहुत याद करता था. हॉस्टल के नियम बहुत कड़े थे इसीलिए सौरव अपनी मां से ज्यादा देर तक बात भी नहीं कर पाता था.
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सौरव को कई बार रात को डर लगता था. घर पर तो वह अपनी मां के पास सोने चला जाता था लेकिन यहां तो ऐसा कुछ संभव नहीं था. उस रात भी वहीं हुआ. दिन में सौरव के सीनियर्स ने उसे कुछ मनगढ़ंत भूतहा किस्से यह कहकर सुनाए थे कि यह सब सच है. बेचारे सौरव ने भी उनकी बातों पर विश्वास कर लिया.
रात को जब सौरव सोने गया तो उसने अपने बेड पर एक अजीब सी लिखावट देखी. वह उसे पढ़ नहीं पा रहा था. उसने महसूस किया कि उसके कमरे में कुछ तो बहुत अजीब है. पहले उसे बदबू आने लगी और बाद में उसे अपनी चीजें इधर-उधर जाती दिखाई दीं. किसी तरह उसने अपनी आंखें बंद की और कब उसे नींद आ गई पता नहीं चला. लेकिन रात को करीब 3 बजे एक खौफनाक आवाज ने उसकी नींद खोल दी.
कोई उसका नाम ले कर तेज-तेज चिल्ला रहा था. उसे यह आवाज अपने ही कमरे में से आ रही थी. सौरव का दिल बहुत कमजोर था. लेकिन फिर भी हिम्मत कर वह इधर-उधर देखने लगा कि कौन है. लेकिन उसे कोई नजर नहीं आया.
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अचानक उसे अपना बेड हिलता हुआ महसूस हुआ. वह चीखने लगा लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की. वह बेड से उतरा और फिर उसी आवाज का पीछा करने लगा. उसे महसूस हुआ कि यह आवाज उसकी अलमारी में से आ रही है. अलमारी जोर-जोर से खटक रही थी. सौरव डर से कांपने लगा लेकिन उसने जैसे ही अलमारी खोली सामने उसे एक भयानक सा व्यक्ति नजर आया. उस खौफनाक चेहरे को देखकर वह डर के मारे बेहोश हो गया और फिर कभी नहीं उठा. डॉक्टरों का कहना था कि दिल का दौरा पड़ने से सौरव की मौत हो गई. उसके सभी सीनियर और क्लासमेट्स को अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ. शायद उन्हें नहीं पता था कि यह छोटा सा मजाक सौरव की जान ले लेगा.
जब सौरव की मां को उसके मरने की खबर दी गई तो वह बिल्कुल पत्थर बन गई. वह ना रोती थी और ना ही कोई हरकत करती थी. बस एक जिन्दा लाश की तरह बैठी रहती थी. लेकिन एक दिन वह बहुत खुश थी. वह ना सिर्फ हंस रही थी बल्कि उसने सौरव के पसंद का खाना भी बनाया था.
जब सौरव के पिता ने उससे पूछा कि वह यह सब क्या कर रही है तो उसने बोला सौरव आया है ना इसीलिए उसकी पसंद का खाना बना रही हूं.
पहले उन्हें लगा कि सौरव के जाने का गम ने सौरव की माता को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है. लेकिन जब उन्हें भी घर में किसी तीसरे के होने का अहसास हुआ तो वह हैरान रह गए. सौरव का कमरा बिल्कुल वैसा था जैसा सौरव के समय होता था. सौरव की आवाजें सुनाई देने लगीं और कभी-कभी तो उसकी छवि भी उसके पिता देख लेते. सौरव की मां बहुत खुश थी क्योंकि उनका बेटा अब कभी ना जाने के लिए उनके पास आ गया है. वह रात को उसी के कमरे में सोती और पहले की ही तरह उसके पसंद का ध्यान रखती. उसके टी.वी. देखने का टाइम और खेलने का टाइम सब फिक्स था. जिसका अनुसरण आज भी किया जाता था. फर्क बस इतना था कि अब सौरव अपनी मां के साथ ही खेलता और उन्हीं के हाथ से खाता क्योंकि और कोई उसे देख नहीं पाता था ना .......!!







